चक्रव्यूह पसरैत

मैथिली कथा-साहित्य केँ वैश्विक कथा सभक समकक्ष ठाढ़ कयनिहार कथाकार अशोक एकटा कवि सेहो छथि। हिनक कवि-रूप सँ साहित्य-समाज नीक जकाँ परिचित अछि। हिनक  कविता-संग्रह ‘चक्रव्यूह’ जखन प्रकाशित भेल त’ लागल जे मैथिली कविता केँ एकटा एहेन दृष्टि-सम्पन्न कवि परि लागि गेलैक अछि जे काव्य-बिम्बक यथास्थिति आ शिल्पक जड़ता केँ तोड़ि नब बाटक संधान करता मुदा ई ठमकि गेला। कविता सँ अपना केँ अलगट्टे काटि लेलनि। कथा-लेखन मे अपना केँ तेना रमा लेलनि जे ‘कथाकार’ विशेषण हिनका लेल संज्ञा बनि गेल। हँ, समीक्षा, आलोचना, संस्मरण तथा संपादन-कार्य आदि केँ आनुषंगिक विधाक रूप मे सदैव संग रखलनि। एहि सभ मे प्रतिमान सेहो स्थापित कयलनि मुदा एहि सभक अछैत अन्तःस्थल मे औनाइत कविता केँ नितुआन नहि होबय देलनि। हिनक हृदय-कपाट पर कविता अपन थाप दइते रहल, तकरे परिणति थिक ई संग्रह। यद्यपि एहि संग्रह मे हिनक पहिल संग्रहक सभटा कविता अनामति अछि, किछुए कविता नब जोड़ल गेल अछि मुदा पाठकक अनुभूति केँ ई संग्रह किछु आर गाढ़-प्रगाढ़ करत।

वर्तमान मे कविता लिखल त’ खूब जा रहल अछि किन्तु बहुतो कविता मोन-प्राण मे नहि बसि पबैत अछि। ‘कनेक्टिविटी’क समस्या सँ जूझैत कविता एकटा शब्द-समूह बनिक’ रहि जाइत अछि। एहने सन स्थिति मे अशोक जीक कविता हृदय मे आलोरण उत्पन्न करत। प्रत्येक कविता अहाँकेँ मोन रहत आ समय-विशेष पर अहाँक संग पूरत। पंच-लाइन सभ केँ ‘कोट’ करबा सँ अपना केँ नहि रोकि सकब अहाँ– ‘आइ जखन एहि शहरक

कोनो मकान सँ धुआँ उठैए

त’ लोक आगि नहि देखैए

अपन आँखि मिड़ैए।’

सरल वाक्यांश मे अर्थ भरबाक ई गुण-विशेष हिनक कवि केँ श्रेष्ठ प्रमाणित करैत अछि। 

विचार सँ औंसल जीवन-मूल्यक तकतान करैत कवि अशोकक काव्य-सामर्थ्य सँ फेर सँ अवगत होयबाक एहि सोनहुल अवसरक प्रतीक्षा अदौ सँ छल। समय-शिला पर अपन काव्य-हस्ताक्षर करयबला एहि कवि सँ एखन आर अपेक्षा अछि।

 

अजित आजाद

3 Comments

  • Zain House

  • Loyal Schroeder

  • Siena Lim

  • uqgUfSsTDjnRyQpm

  • Labore animi libero ad accusamus dignissimos est aperiam. Mollitia voluptatum harum nobis fuga minima. Ratione in veniam sint non est delectus. Esse sint enim vel enim saepe tempore fugiat.

  • Corrupti veniam atque nemo fuga et aut aperiam. Repellat accusantium sunt quas ex dignissimos voluptatum. In perferendis neque perspiciatis provident tenetur ducimus velit. Maiores quia temporibus praesentium nihil.

  • Beatae eum nemo rerum. Deserunt consectetur dolorem sit dolorem aliquam ut. Ut voluptatem vitae repudiandae facere culpa.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Company

Our ebook website brings you the convenience of instant access to a diverse range of titles, spanning genres from fiction and non-fiction to self-help, business.

Features

Most Recent Posts

eBook App for FREE

Lorem Ipsum is simply dumy text of the printing typesetting industry lorem.

Category

Readycoder offer comprehensive business growth solutions, encompassing strategic marketing and technical support services.

Contact Details:-
WhatsApp : +916204061389
Website : www.readycoder.in
Mail : admin@readycoder.in

Categories

बाल साहित्य

योग साहित्य

लघुकथा

समीक्षा

हमारी अवार्डेड किताबें

नाटक

निबंध

Categories

अनुवाद

आत्मकथा

कथा

कविता

गजल

गीत

डायरी

Contact Us

Shop Now

Blog

Cart

Our Authors

Copyright © 2023 Navarambh Publication.  Developed and Designed by Readycoder Private Limited