Jatigat Janganana by Sanjeev Kumar

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जातिगत जनगणना विषय पर लिखी गई यह पहली किताब जातिगत जनगणना के मुद्दे पर बढ़ती राजनीति के दौर में सर्वाधिक ज़रूरी हो जाती है। यह किताब जातिगत जनगणना के विषय को ऐतिहासिक रूप से समझने का प्रयास करता है ताकि आगे आने वाले समय में इस मुद्दे पर उठने वाले सभी सवालों और अफ़वाहों का सच ढूँढा जा सके। इस किताब में कुल छः अध्याय है जिसमें से आख़री के दो अध्याय बिहार के विशेष संदर्भ में है। जातिगत जनगणना के विषय को विस्तृत तौर पर समझने के लिए किस तरह बिहार का उदाहरण सर्वाधिक ऊपयुक्त है किताब इस सवाल पर भी चर्चा करता है।
इस किताब में 370 से अधिक फूटनोट का संदर्भ दिया गया है जिसके लिए कई किताबों, शोधपत्रों, रिपोर्टों के अलावा सांसद और विधान मंडलों में हुए बहसों का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा यह किताब अलग अलग राष्ट्रीय-अंतरष्ट्रिय अख़बारों, पत्र-पत्रिकाओं, न्यूज़ पोर्टल आदि का भी संदर्भ देती है।

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